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Ashok Vajpeyi In Hindi GK In Hindi

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Published: June 19, 2020

ashok vajapeyee ka jeevan parichay

Ashok Vajpeyi In Hindi : अशोक वाजपेयी केवल कवि ही नहीं चिन्तक और आलोचक भी हैं। इनका काव्य-सम्बन्धी चिन्तन आधुनिक जीवन-बोध से जुड़े हुए समर्थ बौद्धिक और संवेदनशील व्यक्ति की सोच का ही परिणाम है। कविता के विषय में लिखी गयी इनकी निम्नलिखित पंक्तियाँ अत्यधिक महत्त्वपूर्ण हैं

“कविता सच या किसी महान अनुभव की तलाश है या नहीं, मैं नहीं जानता। पर इतना तय है कि कवि कविता के माध्यम से, भाषा के संयोजन से अपनी जगह की तलाश करता है। उसे अस्तित्व, मानवीय स्थिति, नियति, उपस्थिति और अनुपस्थिति नश्वरता के प्रश्नों से उलझाती है। इस उलझाव के बिना कोई सार्थक तलाश मुमकिन नहीं। जो कविता इन प्रश्नों से अपने को अलग रखती है, उसे अपनी जगह न समझ में आ सकती है और न ही अन्ततः मिल सकती है।”

अशोक वाजपेयी – Ashok Vajpeyi

श्री अशोक वाजपेयी का जन्म 16 जनवरी, सन् 1941 ई० को तत्कालीन मध्य प्रदेश के दुर्ग नामक स्थान पर हुआ था। इनका परिवार निम्न-मध्यमवर्गीय एवं संस्कारी था। इन्होंने सागर विश्वविद्यालय से बी० ए० तथा सेण्ट स्टीफेन्स कॉलेज, नयी दिल्ली से अंग्रेजी विषय में स्नातकोत्तर उपाधि प्राप्त की। सन् 1965 ई० में नयी दिल्ली के दयाल सिंह कॉलेज के अंग्रेजी विभाग से अध्यापन-कार्य छोड़कर ये भारतीय प्रशासनिक सेवा में चयनित हुए और प्रशासनिक सेवा के अधिकारी के रूप में कार्य किया।

प्रशासनिक सेवा में आने के पूर्व से ही ये कवि रूप में चर्चित रहे हैं। मध्य प्रदेश सरकार के महत्त्वपूर्ण पदों पर रहते हुए कला, साहित्य और संस्कृति के क्षेत्र में इनके द्वारा प्रकल्पित और। स्थापित संस्थानों, आयोजनों, प्रकाशनों और विमर्शो की महत्त्वपूर्ण भूमिका रही है। ये ‘जामिया मिलिया इस्लामिया’ विश्वविद्यालय तथा ‘बिरला फाउण्डेशन से भी सम्बद्ध रह चुके हैं। भोपाल में इन्होंने एक बहु-आयामी कलाकेन्द्र ‘भारत भवन’ की स्थापना की। वर्धा स्थित महात्मा गाँधी अन्तर्राष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय के ये प्रथम कुलपति रहे।

विख्यात हिन्दी कवि, आलोचक और सम्पादक अशोक वाजपेयी को ‘साहित्य अकादमी पुरस्कार,दयावती कवि-शेखर सम्मान’ और ‘कबीर सम्मान से सम्मानित किया जा चुका है। एक विद्वान के रूप में इन्होंने यूरोप के विभिन्न सम्मेलनों में भाग लिया है और भाषण भी दिये हैं। इन्हें पोलैण्ड के राष्ट्रपति द्वारा “द ऑफिसर्स क्रॉस ऑफ मेरिट ऑफ द रिपब्लिक ऑफ पोलैण्ड’ तथा फ्रान्सीसी सरकार द्वारा “ऑफिसर डी० एल० ऑर्डर डेस आर्ट्स एट डेस लेटर्स’ पुरस्कारों द्वारा भी सम्मानित किया जा चुका वर्तमान में ये ‘ललित कला अकादमी’ के अध्यक्ष हैं और नयी दिल्ली में ही निवास कर सतत साहित्यसाधना में संलग्न हैं।

रचनाएँ-Ashok Vajpeyi In Hindi

श्री अशोक वाजपेयी की 15 कविता-पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं, जिनमें प्रमुख हैं शहर अब भी सम्भावना है,एक पतंग अनंत,अगर इतने से,तत्पुरुष’, कहीं नहीं वहीं,बहुरि अकेला,इबारत से गिरी मात्राएँ,आविन्यो,अभी कुछ और,समय के पास समय,उम्मीद का दूसरा नाम,तिनका तिनका,थोड़ी-सी जगह,घास में दुबका आकाश,पुनरपि’ तथा ‘विवक्षा’। साहित्य और

आलोचना से सम्बन्धित इनकी सात कृतियाँ प्रकाशित हुई हैं, जिनमें प्रमुख हैं-‘फिलहाल,कुछ पूर्वाग्रह,समय से बाहर,कविता का गल्प’ और ‘सिद्धियाँ शुरू हो गयी हैं। इनकी कला से सम्बन्धित तीन पुस्तकें अंग्रेजी में भी प्रकाशित हुई हैं। इनकी कविताओं के अनुवाद बाँग्ला, मराठी, गुजराती, उर्दू, राजस्थानी, अंग्रेजी, पोलिश और फ्रेंच भाषाओं में हो चुके हैं। ये ‘समवेत,पहचान,कविता एशिया,बहुवचन,समास,पूर्वाग्रह’ आदि पत्रिकाओं के सलाहकार व सम्पादक रह चुके हैं तथा अभी भी कुछ पत्रिकाओं का सम्पादन कर रहे हैं।

साहित्य में स्थान-

अशोक वाजपेयी ने अपने समय की सच्चाई को मूर्त रूप प्रदान कर कविता के क्षेत्र में अपना नाम दर्ज कराया है, जो कि वास्तव में एक कठिन कार्य है और इतनी प्रतिभा विरलों में ही । होती है। आधुनिक हिन्दी-साहित्य में इनका स्थान इनके कर्तृत्व के कारण सदा याद किया जाएगा।

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