TheGk

Bhagavath Sharan Upadhyay In Hindi GK In Hindi

Whatsapp Share Twitter Share Pinterest Share
Published: June 19, 2020

Bhagavath Sharan Upadhyay

Bhagavath Sharan Upadhyay In Hindi :  संस्कृत-साहित्य तथा पुरातत्त्व के समर्थ अध्येता एवं हिन्दी-साहित्य के प्रसिद्ध उन्नायक भगवतशरण उपाध्याय अपने मौलिक और स्वतन्त्र विचारों के लिए प्रसिद्ध हैं। ये प्राचीन भारतीय इतिहास एवं । संस्कृति के प्रमुख अध्येता और व्याख्याकार होते हुए भी रूढ़िवादिता एवं परम्परावादिता से ऊपर रहे हैं।

भगवतशरण उपाध्याय-Bhagavath Sharan Upadhyay

‘भगवतशरण उपाध्याय’ : का जन्म सन् 1910 ई० में बलिया (उत्तर प्रदेश) जिले के ‘उजियारपुर’ नामक ग्राम में हुआ था। इनकी प्रारम्भिक शिक्षा अपने ग्राम में हुई। उच्च शिक्षा-प्राप्ति के लिए ये बनारस आये और काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से प्राचीन इतिहास में एम० ए० की परीक्षा उत्तीर्ण की। ये संस्कृत-साहित्य और पुरातत्त्व के अध्येता तथा हिन्दी-साहित्य के उन्नायक रहे हैं।

ये प्रयाग एवं लखनऊ संग्रहालयों के पुरातत्त्व विभाग के अध्यक्ष भी रहे हैं। इन्होंने पिलानी स्थित बिड़ला महाविद्यालय में प्राध्यापक के पद पर भी कार्य किया। तत्पश्चात् विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन में प्राचीन इतिहास विभाग के प्रोफेसर एवं अध्यक्ष पद पर कार्य करके अवकाश ग्रहण किया और देहरादून में स्थायी रूप से निवास करते हुए साहित्य-सेवा में जुट गये। अगस्त, सन् 1982 ई० में इसे मनीषी साहित्यकार ने इस असारे संसार से विदा ले ली।

रचनाएँ-

भगवतशरण उपाध्याय  जी ने हिन्दी में तो विपुल साहित्य की रचना की ही है, किन्तु अंग्रेजी में भी इनकी कुछ एक प्रसिद्ध रचनाएँ हैं। इनकी उल्लेखनीय रचनाएँ निम्नलिखित हैं

1. पुरातत्त्व-‘मन्दिर और भवन,भारतीय मूर्तिकला की कहानी,भारतीय चित्रकला की कहानी’,’कालिदास का भारत’। इन पुस्तकों में प्राचीन भारतीय संस्कृति, साहित्य और कला का सूक्ष्म वर्णन हुआ है।।

2. इतिहास-खून के छींटे,इतिहास साक्षी है,इतिहास के पन्नों पर,प्राचीन भारत का इतिहास,साम्राज्यों के उत्थान-पतन’ आदि। इन पुस्तकों में प्राचीन इतिहास को साहित्यिक सरसता के साथ प्रस्तुत किया गया है।

3. आलोचना-विश्व साहित्य की रूपरेखा,साहित्य और कला,कालिदास’ आदि। इन ग्रन्थों में साहित्य के विविध पक्षों पर प्रकाश डाला गया है।

4. यात्रा-वृत्तान्त-‘कलकत्ता से पीकिंग,सागर की लहरों पर,मैंने देखा लाल चीन’ आदि। इनमें इनकी विदेश-यात्राओं का सजीव विवरण है।

5. संस्मरण और रेखाचित्र–‘मैंने देखा,इँठा आम’। इनमें स्मृति के साथ-साथ संवेदना के रंगों से भरे सजीव शब्द-चित्र उभारे गये हैं।

6. अंग्रेजी ग्रन्थ-इण्डिया इन कालिदास,वीमेन इन ऋग्वेद’ तथा ‘एंशियेण्ट इण्डिया’। साहित्य में स्थान-उपाध्याय जी पुरातत्त्व और संस्कृति के महान् विद्वान् हैं। उन्होंने अपने गम्भीर और सूक्ष्म अध्ययन को अपनी रचनाओं में साकार रूप प्रदान किया है। वे हिन्दी के पुरातत्त्वविद्, भारतीय  संस्कृति के अध्येता, रेखाचित्रकार और महान शैलीकार थे। विदेशों में दिये गये उनके व्याख्यान हिन्दी साहित्य की अमूल्य धरोहर हैं। इन्होंने सौ से भी अधिक पुस्तकें लिखकर हिन्दी-साहित्य में अपना उल्लेखनीय स्थान बनाया है।

Bhagavath Sharan Upadhyay Bhagavath Sharan Upadhyay In Hindi