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Kedar Nath Sing In Hindi GK In Hindi

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Published: June 19, 2020

kedar naath sing ka jeevan parichay

Kedar Nath Sing In Hindi : कवि केदारनाथ सिंह ने अपने समकालीन कवियों की तुलना में बहुत कम कविताएँ लिखी हैं। परन्तु इनकी कविताएँ निजत्व की विशिष्टता से परिपूर्ण हैं। शहर में रहते हुए भी ये गंगा और घाघरा के मध्य की अपनी धरती को भूले नहीं थे। खुले कछार, हरियाली से लहलहाती फसलें और दूर-दूर तक जाने वाली पगडण्डियाँ इनके हृदय को भाव-विह्वल बनाती थीं।

केदारनाथ सिंह – Kedar Nath Sing In Hindi

केदारनाथ सिंह जी का जन्म 7 जुलाई, सन् 1934 ई० को उत्तर प्रदेश के बलिया जनपद के चकिया नामक गाँव में हुआ था। इन्होंने काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से 1956 ई० में एम० ए० और 1964 ई० में पीएच० डी० की। सन् 1978 ई० में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के भारतीय भाषा विभाग में हिन्दी भाषा के प्रोफेसर (आचार्य) नियुक्त होने के पूर्व इन्होंने वाराणसी, गोरखपुर और पडरौना के कई स्नातक-स्नातकोत्तर विद्यालयों में अध्यापन कार्य किया।

सन् 1999 में इन्होंने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग के प्रोफेसर पद से अवकाश-ग्रहण किया और इसके बाद ये यहीं से मानद प्रोफेसर के रूप में जुड़े हुए थे। केदारनाथ सिंह जी को अनेक सम्माननीय सम्मानों से सम्मानित किया गया है। सन् 1980 में इन्हें ‘कुमारन असन’ कविता-पुरस्कार तथा सन् 1989 में ‘अकाल में सारस’ रचना के लिए ‘साहित्य अकादमी पुरस्कार प्रदान किया गया।

कतिपय कारणों से इन्होंने हिन्दी अकादमी, दिल्ली द्वारा प्रदत्त सर्वोच्च शलाका सम्मान ठुकरा दिया। लम्बी बीमारी के कारण 19 मार्च, 2018 को इनको निधन हो गया।

रचनाएँ-

Kedar Nath Sing  द्वारा कविता व गद्य की अनेक पुस्तकों की रचना की गयी है, जिनमें से प्रमुख निम्नलिखित हैं

(1) कविता-संग्रह-अभी बिलकुल अभी,जमीन पक रही है,यहाँ से देखो,अकाल में सारस,टॉल्सटॉय और साइकिल’ एवं तीसरा सप्तक’ में संकलित प्रकाशित कविताएँ। ‘बाघ’ इनकी प्रमुख लम्बी कविता है, जो मील का पत्थर मानी जा सकती है। ‘जीने के लिए कुछ शर्ते, ‘प्रक्रिया,सूर्य,एक प्रेम-कविता को पढ़कर,आधी रात,बादल ओ,रात,अनागत,माँझी का पुल,फर्क नहीं पड़ता’,आदि इनकी प्रमुख कविताएँ हैं।

(2) निबन्ध और कहानियाँ-‘मेरे समय के शब्द,कल्पना और छायावाद,हिन्दी कविता में बिम्बविधान,कब्रिस्तान में पंचायत’ आदि।

(3) अन्य-‘ताना-बाना’।साहित्य में स्थान-कवि केदारनाथ सिंह के मूल्यांकन के लिए आवश्यक है कि इनकी 1960 ई० और उसके बाद की कविताओं के बीच एक विभाजक रेखा खींच दी जाए। अपनी कविताओं के माध्यम से ये भ्रष्टाचार, विषमता और मूल्यहीनता पर सधा हुआ प्रहार करते थे। प्रगतिशील लेखक संघ से सम्बद्ध श्री  केदारनाथ सिंह जी समकालीन हिन्दी कविता के प्रमुख हस्ताक्षर और आधुनिक हिन्दी कवियों में उच्च स्थान के अधिकारी हैं।

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